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आप अपने बच्चों की परवरिश कैसे करें? क्या कोई कमी तो नहीं रह गई? श्री मनोहर दास जी महाराज।
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सभी दर्शकों को ॐ ब्रह्म सत्यं के परिवार की ओर से हार्दिक शुभ मंगलकामनाएं। आज का विषय है : "बच्चों की परवरिश" बच्चों से ही हमारा जीवन है और बच्चों की परवरिश में कोई कमी रह गई तो आप मान के चलिएगा कि आपका जीवन नर्क हो जाएगा। बच्चे शिक्षित नहीं निकले, योग्य नहीं हो पाए, परवरिश में कहीं ऐसी कोई कमी रह गई जिससे आप लोगों कॆ बीच में प्रेम नहीं बन पाया उनसे, तो बुढ़ापा आपका खराब हो जाएगा। आप बच्चों के लिए ना सही, आपका अपना बुढ़ापा खराब ना हो, उसके लिए आप बच्चों की परवरिश अपनी तरह से करें, अपना तरीका मतलब हमारे धर्म के अनुसार चलें, हमारे शास्त्रों के अनुसार अपने बच्चों की परवरिश करें। बड़ी विडंबना की बात है आज के समय में, बच्चों की परवरिश के लिए कोई आया रख लेते हैं और हम खुद व्यस्त हो जाते हैं अपने अपने कामों में। कोई व्यापार में लग जाते हैं और कोई नौकरी करने चले जाते हैं, इसी वजह से हम बच्चों से अच्छे से मिल नहीं पाते और बात नहीं कर पाते। एक छोटा सा उदाहरण भगवान श्री कृष्ण का: मां यशोदा और भगवान कृष्ण की बाल लीला। आप हम सबको पता है कि नंद बाबा के पास 900000 गाय हुआ करती...
अगर ये जान लिया तो कभी भी आपका और आपके अपनों का तलाक़ नहीं होगा | श्री ...
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अगर ये जान लिया तो कभी भी आपका और आपके अपनों का तलाक़ नहीं होगा | श्री ...
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WHY YOU SHOULD DO ‘OM’ CHANTING?
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‘OM’ is the absolute Omnipotent and Omnipresent sound of cosmos! That’s why it’s called as _Pranav_; the energy which runs through our _Prana. ‘OM’ stands as the primary sound amongst all the voices and sounds, existent in the Universe. According to the Vedas, ‘OM’ is the sound, which represents the Energy of the cosmos. All of our Veda Mantras start with the chanting of ‘OM’ sound, which is an evident indication of Divine Power. In Hinduism, the religious Texts signify ‘OM’ as the ONE – supreme power or _Brahman_ [The Absolute], which is...
चारों मठ भारतीय संस्कृति और वेदों के केंद्र हैं - आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठ
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जिस प्रकार भारत में चार धाम स्थित हैं, उसी प्रकार चार दिशाओं में चार मठ हैं। यह चारों मठ भारतीय संस्कृति और वेदों के केंद्र हैं। इन चार मठों की स्थापना सातवीं शताब्दी में जन्मे, शंकर का अवतार कहे जाने वाले आदि शंकराचार्य ने की थी। सातवीं और आठवीं शताब्दी में, जब सनातन धर्म की प्रतिष्ठा जैन और बौद्धों के कारण क्षीण हो गई थी, तब केरल में जन्मे मात्र छह वर्ष के बालक आदि शंकर ने पूर्व से पश्चिम और उतर से दक्षिण तक यात्राएं कर, शास्त्रार्थ कर, भाष्य लिख कर वैदिक सनातन धर्म की पुनर्स्थापना की। आदि शंकराचार्य ने व...